Buddha Teach
Dr babasaheb Ambedkar
क्यू मारे जा रहे हमारे जवान जम्मू-कश्मिर मे | झेलम खून की नदी क्यो बन रही है
Saturday, 16 February 2019
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*क्यू मारे जा रहे हमारे जवान जम्मू-कश्मिर मे | झेलम खून की नदी क्यो बन रही है !*
✍ - हर्षवर्धन ढोके
The Republican
देश और दुनिया मे देखा जाये तो पिछले ७० साल मे सबसे बडा कोई मसला हो तो वो शायदही काश्मिर और भारत के विवादास्पद सबंध है | हर दिन काश्मिर मे मरने वाले भारतीय जवानो की अंक संकेत अब लाखो के घर मे पहुच गये होंगे | धर्म की वर्चस्वता को कायम रखने के लिये ऐसा तो नही; जम्मू काश्मिर की झेलम और तावी नदी अब खून की प्यासी हो गयी है | मेरे भाईयो शांती और अमन काश्मिर मे न कभी था; और न कभी होगा | क्यू ऐसा हो रहा है ; आईये देखते है इस देश की राजनितीऔर धर्म प्रेम इस बात को किस तरह जिम्मेदार है |
जवाहरलाल नेहरु इस देश के प्रधानमंत्रीही नही तो वे भारत के परराष्ट्र मंत्री भी थे | १९४७ से १९६४ तक नेहरु भारत के परराष्ट्री मंत्री रहे | मायकल बेचर लिखते है की, नेहरु की परराष्ट्र धोरण यह उनकी खुदकी मक्तेदारी थी | परराष्ट्र धोरण की स्वतंत्र समिती होने के बावजूद भी नेहरु के इस समिती का कोई भी सदस्य नेहरु के परराष्ट्र धोरण मे हिस्सा नही लेते थे | नेहरु के परराष्ट्र धोरण की सभी पॉलिसिया कितनी गलत है ये डॉ बाबासाहब आंबेडकरने संसद मे विद्वत्तापूर्ण टिका करके नेहरु का पर्दाफाश किया था | मगर तत्कालीन नेताओ को बाबासाहब की प्रज्ञा समजने की प्रज्ञा न होने के कारण आज भारत सभी समस्याओ से घिरा है | संसद मे नेहरु के परराष्ट्र धोरण के उपर टिकात्मक बाबासाहब ने किये हुवे कुछ निम्नलिखीत बाते इस तरह है;
१) पाकिस्तान का बटवारा.
२) भारत-चीन सबंध और पंचशील करार.
३) भारत और साम्यवादी रशिया सबंध.
४) लोकशाही देशो से सबंध न रखने की उदासिनता.
५)सिटो करार और सुयझ कालवा घातक.
६) गोवा का सवाल.
३) काश्मिर की बटवारा.
बाबासाहब ने संसद मे नेहरु के परराष्ट्र धोरण पर जमकर टिका की | बाबासाहब ने जो भी कहा वे सभी बाते आज सच्चाई का रुप ले रही है | बाबासाहब के लिखान और भाषण के खिलाप इस देश ने दुर्लक्ष करने भारत आज कही समस्या से गुजर रहा है | वर्तमान मे भी देश की ऐसी कोई समस्या नही होंगी जिसके उपर बाबासाहब ने उपाय (solution) नही दिया हो | आईये देखते इन सभी बातो मे से *काश्मिर के बटवारे* का क्या मसला है |
भारतीय संविधान के ३७० के कलम अनुसार जम्मू काश्मिर यह एक स्वतंत्र राज्य है | जम्मू काश्मिर के उपर भारत का किसी भी प्रकार का कोई भी अधिकार नही है | जहा भारत का संविधान भारत मे कही पे भी संचार और नागरिकत्व का अभिव्यक्ती स्वातंत्र अधिकार देता है वहा भारत का कोई भी नागरिक मगर जम्मू काश्मिर का नागरिकत्व नही ले सकता | ना वो वहा किसी भी स्थाई संपत्ती का मालक बन सकता है | (जैसे जमिन और जुमला) ३७० के कलम अनुसार काश्मिर यह एक स्वतंत्र राज्य है और वहा की शासनप्रणाली ३७० के कलम के अनुसार स्वतंत्र राज्यप्रणाली है | जम्मू काश्मिर मे वार्षिक प्राप्त किसी भी आमदनी, कर, अर्थ का कोई भी हिस्सा भारत सरकार के अधिकोष जाता नही | यहा तक जम्मू काश्मिर का ध्वज यह भारत का राष्ट्रध्वज नही तो बल्की उनका खुद का अन्य ध्वज है | ना वे भारत के संविधान को मानते है ना भारत के राष्ट्रध्वज को मानते है | भारतीय संविधान का कोई भी प्राविधान जम्मू काश्मिर के ३७० कलम को छोडकर अधिनियम बनाया जाता है |
१९४७ से २०१९ तक जम्मू काश्मिर का कोई भी भाग हो, अर्थ हो या सांस्कृतिक या राजनैतिक हो; जम्मू काश्मिर भारत के हर क्षेत्र से अलिप्त रहे है | भारत को किसी भी प्रकार का फायदा जम्मू काश्मिर से नही है | इस बात को देखते हुवे डॉ. आंबेडकरने ३७० वे कलम का जमकर विरोध संविधान सभा मे किया | मगर पटेल और नेहरु ने बाबासाहब के विरोध मे जाकर ३७० कलम भारतीय संविधान मे घुसड दी | बाबासाहब का कहना था की, जब भारत को किसी भी प्रकार का अधिकार यदी जम्मू काश्मिर पर नही तो हम हमारे जवान वहा मरने क्यु भेजे ? क्यु हमारे आमदनी का अरबो रुपये भारतीय जवानो और जम्मू काश्मिर के संरक्षण पर लगाये ? जहा की भारत मे भुकमरी, दरिद्रता, बेकारी यह समस्या रहते हुवे वे सुलझाने को भारत का अरबो रुपये खर्च करने के बजाये नाहक जम्मू काश्मिर के संरक्षण खर्च पर क्यु लगाये ?
बाबासाहब संसद मे कहते है, एक मुस्लीम राष्ट्र को अन्य मुस्लीम राष्ट्र प्रती प्रेम होता है | धर्म राष्ट्रवाद को मारक होता है | हम चाहे जितना भी करले पाकिस्तान अपने मुस्लीम प्रांत के लिये खून खराबा करेंगेही | इसके उपर उपाय देते हुवे आंबेडकर कहते है, 'काश्मिर का बटवारा' किया जाये | तिबेट और जम्मू काश्मिर का बौद्ध-हिंदू भाग भारत से जोडा जाये और काश्मिरका बचा हुवा मुस्लीम भाग पाकिस्तान को दिया जाये | मुस्लीम प्रांत के उपर भारत का कोई अधिकार नही है | यदी पाकिस्तान के बटवारे के बाद यह नही होता तो यह भविष्य मे कभी नही होगा |
डॉ. आंबेडकर की इस प्रज्ञा को समजने के तत्कालीन नेते ही नही तो बल्की वर्तमान के सभी नेते असफल है | १९४७ के इसे खून खराबे के सरकारी आकडे चाहे कुछ हो मगर वास्तविक प्रकार रोंगटे खडे करने वाला है | यदी काश्मिर का बौद्ध-हिंदू भाग भारत को जोडा जाये और मुस्लीम भाग पाकिस्तान को दिया जाये तो १९४७ से लेकर २०१९ तक काश्मिर मे मासूम लोगो को मौत के घाट से बचाया जा सकता है | भारत के जवान इनकी बली रोकी जा सकती है | हर बार जवान मरने के बाद अमन और शांती दो मिनिट की मौन सभा लेने से नही अम्मल हो सकती तो उसके उपर ठोस कदम उठाने से होती है | नाहक काश्मिर के उपर हर साल भारत से लगाया जाने वाला अरबो रुपया भारत के शिक्षा तथा अन्य योजना पर खर्च किया जा सकता है |
जो लोग काश्मिर की हवाये, घाटिया और बर्फिले चादर को अपने ऐश आराम के लिये रोखकर रखना चाहते है उसी स्वर्ग कहने वाले काश्मिर मे कही मासूम लोगो को और भारतीय जवानो को काश्मिरमे ही स्वर्गवासी बनाने मे आनंद ले रहे हो | काश्मिर का मुस्लीम भाग पाकिस्तान को देने के बाद भी काश्मिर स्वर्ग जैसी घाटिया उन कामचोर लोगो के सैर सपाटे के लिये ऐश करने के लिये बचती ही है !
यह सिर्फ एक लेख न होते हुवे भारत सरकार के पास डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के मानवकल्याणकारी उद्देश को समजनी की प्रज्ञा है क्या ? ये सवाल कल मरे ४२ जवानो को श्रद्धांजली के तौर पर आज भी प्रश्नांकित है | कोई जवान मरने के बाद श्रद्धांजली देना बहोत आसान बात है; मगर जवान मरे नही इसके उपर काम करना मै महानता समजता हू |
*कल शहिद हुवे मेरे भाई जवानो को मेरी और मेरी पुरी टिम The Republican की तरफ से श्रद्धांजली |*
जय जवान !
जय रिपब्लीक इंडिया ! 🇮🇳
*हर्षवर्धन ढोके* (प्रवक्ता)
*The Republican*
REPUBLICAN PARTY OF INDIA
15/02/19
✍ - हर्षवर्धन ढोके
The Republican
देश और दुनिया मे देखा जाये तो पिछले ७० साल मे सबसे बडा कोई मसला हो तो वो शायदही काश्मिर और भारत के विवादास्पद सबंध है | हर दिन काश्मिर मे मरने वाले भारतीय जवानो की अंक संकेत अब लाखो के घर मे पहुच गये होंगे | धर्म की वर्चस्वता को कायम रखने के लिये ऐसा तो नही; जम्मू काश्मिर की झेलम और तावी नदी अब खून की प्यासी हो गयी है | मेरे भाईयो शांती और अमन काश्मिर मे न कभी था; और न कभी होगा | क्यू ऐसा हो रहा है ; आईये देखते है इस देश की राजनितीऔर धर्म प्रेम इस बात को किस तरह जिम्मेदार है |
जवाहरलाल नेहरु इस देश के प्रधानमंत्रीही नही तो वे भारत के परराष्ट्र मंत्री भी थे | १९४७ से १९६४ तक नेहरु भारत के परराष्ट्री मंत्री रहे | मायकल बेचर लिखते है की, नेहरु की परराष्ट्र धोरण यह उनकी खुदकी मक्तेदारी थी | परराष्ट्र धोरण की स्वतंत्र समिती होने के बावजूद भी नेहरु के इस समिती का कोई भी सदस्य नेहरु के परराष्ट्र धोरण मे हिस्सा नही लेते थे | नेहरु के परराष्ट्र धोरण की सभी पॉलिसिया कितनी गलत है ये डॉ बाबासाहब आंबेडकरने संसद मे विद्वत्तापूर्ण टिका करके नेहरु का पर्दाफाश किया था | मगर तत्कालीन नेताओ को बाबासाहब की प्रज्ञा समजने की प्रज्ञा न होने के कारण आज भारत सभी समस्याओ से घिरा है | संसद मे नेहरु के परराष्ट्र धोरण के उपर टिकात्मक बाबासाहब ने किये हुवे कुछ निम्नलिखीत बाते इस तरह है;
१) पाकिस्तान का बटवारा.
२) भारत-चीन सबंध और पंचशील करार.
३) भारत और साम्यवादी रशिया सबंध.
४) लोकशाही देशो से सबंध न रखने की उदासिनता.
५)सिटो करार और सुयझ कालवा घातक.
६) गोवा का सवाल.
३) काश्मिर की बटवारा.
बाबासाहब ने संसद मे नेहरु के परराष्ट्र धोरण पर जमकर टिका की | बाबासाहब ने जो भी कहा वे सभी बाते आज सच्चाई का रुप ले रही है | बाबासाहब के लिखान और भाषण के खिलाप इस देश ने दुर्लक्ष करने भारत आज कही समस्या से गुजर रहा है | वर्तमान मे भी देश की ऐसी कोई समस्या नही होंगी जिसके उपर बाबासाहब ने उपाय (solution) नही दिया हो | आईये देखते इन सभी बातो मे से *काश्मिर के बटवारे* का क्या मसला है |
भारतीय संविधान के ३७० के कलम अनुसार जम्मू काश्मिर यह एक स्वतंत्र राज्य है | जम्मू काश्मिर के उपर भारत का किसी भी प्रकार का कोई भी अधिकार नही है | जहा भारत का संविधान भारत मे कही पे भी संचार और नागरिकत्व का अभिव्यक्ती स्वातंत्र अधिकार देता है वहा भारत का कोई भी नागरिक मगर जम्मू काश्मिर का नागरिकत्व नही ले सकता | ना वो वहा किसी भी स्थाई संपत्ती का मालक बन सकता है | (जैसे जमिन और जुमला) ३७० के कलम अनुसार काश्मिर यह एक स्वतंत्र राज्य है और वहा की शासनप्रणाली ३७० के कलम के अनुसार स्वतंत्र राज्यप्रणाली है | जम्मू काश्मिर मे वार्षिक प्राप्त किसी भी आमदनी, कर, अर्थ का कोई भी हिस्सा भारत सरकार के अधिकोष जाता नही | यहा तक जम्मू काश्मिर का ध्वज यह भारत का राष्ट्रध्वज नही तो बल्की उनका खुद का अन्य ध्वज है | ना वे भारत के संविधान को मानते है ना भारत के राष्ट्रध्वज को मानते है | भारतीय संविधान का कोई भी प्राविधान जम्मू काश्मिर के ३७० कलम को छोडकर अधिनियम बनाया जाता है |
१९४७ से २०१९ तक जम्मू काश्मिर का कोई भी भाग हो, अर्थ हो या सांस्कृतिक या राजनैतिक हो; जम्मू काश्मिर भारत के हर क्षेत्र से अलिप्त रहे है | भारत को किसी भी प्रकार का फायदा जम्मू काश्मिर से नही है | इस बात को देखते हुवे डॉ. आंबेडकरने ३७० वे कलम का जमकर विरोध संविधान सभा मे किया | मगर पटेल और नेहरु ने बाबासाहब के विरोध मे जाकर ३७० कलम भारतीय संविधान मे घुसड दी | बाबासाहब का कहना था की, जब भारत को किसी भी प्रकार का अधिकार यदी जम्मू काश्मिर पर नही तो हम हमारे जवान वहा मरने क्यु भेजे ? क्यु हमारे आमदनी का अरबो रुपये भारतीय जवानो और जम्मू काश्मिर के संरक्षण पर लगाये ? जहा की भारत मे भुकमरी, दरिद्रता, बेकारी यह समस्या रहते हुवे वे सुलझाने को भारत का अरबो रुपये खर्च करने के बजाये नाहक जम्मू काश्मिर के संरक्षण खर्च पर क्यु लगाये ?
बाबासाहब संसद मे कहते है, एक मुस्लीम राष्ट्र को अन्य मुस्लीम राष्ट्र प्रती प्रेम होता है | धर्म राष्ट्रवाद को मारक होता है | हम चाहे जितना भी करले पाकिस्तान अपने मुस्लीम प्रांत के लिये खून खराबा करेंगेही | इसके उपर उपाय देते हुवे आंबेडकर कहते है, 'काश्मिर का बटवारा' किया जाये | तिबेट और जम्मू काश्मिर का बौद्ध-हिंदू भाग भारत से जोडा जाये और काश्मिरका बचा हुवा मुस्लीम भाग पाकिस्तान को दिया जाये | मुस्लीम प्रांत के उपर भारत का कोई अधिकार नही है | यदी पाकिस्तान के बटवारे के बाद यह नही होता तो यह भविष्य मे कभी नही होगा |
डॉ. आंबेडकर की इस प्रज्ञा को समजने के तत्कालीन नेते ही नही तो बल्की वर्तमान के सभी नेते असफल है | १९४७ के इसे खून खराबे के सरकारी आकडे चाहे कुछ हो मगर वास्तविक प्रकार रोंगटे खडे करने वाला है | यदी काश्मिर का बौद्ध-हिंदू भाग भारत को जोडा जाये और मुस्लीम भाग पाकिस्तान को दिया जाये तो १९४७ से लेकर २०१९ तक काश्मिर मे मासूम लोगो को मौत के घाट से बचाया जा सकता है | भारत के जवान इनकी बली रोकी जा सकती है | हर बार जवान मरने के बाद अमन और शांती दो मिनिट की मौन सभा लेने से नही अम्मल हो सकती तो उसके उपर ठोस कदम उठाने से होती है | नाहक काश्मिर के उपर हर साल भारत से लगाया जाने वाला अरबो रुपया भारत के शिक्षा तथा अन्य योजना पर खर्च किया जा सकता है |
जो लोग काश्मिर की हवाये, घाटिया और बर्फिले चादर को अपने ऐश आराम के लिये रोखकर रखना चाहते है उसी स्वर्ग कहने वाले काश्मिर मे कही मासूम लोगो को और भारतीय जवानो को काश्मिरमे ही स्वर्गवासी बनाने मे आनंद ले रहे हो | काश्मिर का मुस्लीम भाग पाकिस्तान को देने के बाद भी काश्मिर स्वर्ग जैसी घाटिया उन कामचोर लोगो के सैर सपाटे के लिये ऐश करने के लिये बचती ही है !
*कल शहिद हुवे मेरे भाई जवानो को मेरी और मेरी पुरी टिम The Republican की तरफ से श्रद्धांजली |*
जय जवान !
जय रिपब्लीक इंडिया ! 🇮🇳
*हर्षवर्धन ढोके* (प्रवक्ता)
*The Republican*
REPUBLICAN PARTY OF INDIA
15/02/19
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