✍️ आपले लेख पाठवा
🆕 नवीन लेख

    कमांडर अभिनंदन जी रिहाई का राज.


     12 ऑगस्ट 1949 में  एक अंतरराष्ट्रीय कानून बनाया गया है जिसे "जेनेवा कन्वेंशन एक्ट 1949"  कहा जाता है | जिसमें कुल 64 आर्टिकल है | जिसे दुनिया के 194 देशों ने साइन किया है | 

    आइए जानते हैं कि जिनीवा कन्वेंशन आखिर है क्या:


    ◆ POW (प्रिज़नर्स ऑफ वॉर) यानी युद्धबंदियों के अधिकारों और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए जिनीवा कन्वेंशन में कुछ नियम बनाए गए हैं।

     ◆ जिनीवा कन्वेंशन में तीन संधियां और 3 अतिरिकत (अडिशनल) प्रोटोकॉल्स हैं, जिनका मकसद मानवीय मूल्यों को बनाए रखने व उनकी रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून बनाना है। जिनीवा संधि की जो व्यवस्था आज दुनिया भर में मान्य है उसकी नींव 1929 और 1949 के जिनीवा कन्वेंशन के तहत रखी गई, जिनमें पहले की संधियों की मुख्‍य बातों को शामिल कर लिया गया।



    ◆ जिनीवा कन्वेंशन के मुताबिक, टीवी पर अगर युद्धबंदियों के चित्र, विडियो या उनसे जुड़ी अन्य चीजें दिखाई जाती हैं तो यह जिनीवा कन्वेंशन का उल्लंघन है। अभिनंदन के मामले में पाकिस्तान पहले ही ऐसा कर चुका है और इस हिसाब से अब उसे अभिनंदन के साथ जिनीवा कन्वेंशन को ध्यान में रखकर ही बर्ताव करना होगा।

     ◆ जिनीवा कन्वेंशन में साफ-साफ बताया गया है कि युद्धबंदियों के क्या अधिकार हैं। इसके मुताबिक, युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जाएगा। उसे किसी भी तरह से प्रताड़ित या फिर शोषित नहीं किया जाएगा।

    ◆ इस कन्वेंशन के तहत, पकड़े जाने पर युद्धबंदी सिर्फ अपना नाम, अपना सीरियल नंबर और पोज़िशन ही बता सकता है ताकि वह किसी खतरे की चपेट में न आए।

    ◆ जिनीवा कन्वेंशन के तहत कोई भी देश अपने युद्धबंदी को न तो अपमानित कर सकता है और न ही डरा-धमका सकता है।


    ◆ हिरासत में लेने वाला देश युद्धबंदी के खिलाफ संभावित युद्ध अपराध के लिए मुकदमा चला सकता है, लेकिन हिंसा की कार्रवाई के लिए नहीं जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत विधिपूर्ण है।

    ◆ कन्वेंशन कहता है कि युद्ध खत्म होने पर युद्धबंदी को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए और उसे उसके देश भेजा जाना चाहिए।

    ◆ कोई देश युद्धबंदी से उसकी जाति, धर्म या रंग-रूप के बारे में नहीं पूछ सकता और अगर कोशिश की भी जाए तो युद्धबंदी अपने नाम, सर्विस नंबर और रैंक के अलावा कुछ भी अन्य जानकारी नहीं देगा।


    ◆ युद्धबंदियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। कन्वेंशन के अनुच्छेद 3 के अनुसार, युद्धबंदियों का सही तरीके के इलाज किया जाएगा।

    ◆ कोई भी देश अपने युद्धबंदी के साथ ऐसा काम नहीं कर सकता जिससे कि जनमानस के बीच किसी तरह की उत्सुकता पैदा हो।

     ◆ जिनीवा कन्वेंशन के तहत युद्धबंदी को उचित खाना-पीना दिया जाता है और उसकी हर तरह से देखभाल की जाती है।
    Previous article
    Next article

    Leave Comments

    Post a Comment

    Iklan Atas Artikel

    Iklan Tengah Artikel 1

    Iklan Tengah Artikel 2

    Iklan Bawah Artikel

    WhatsApp
    ⇧
    🌐 भाषा: