Dr babasaheb Ambedkar
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माईसाहब (डाॅ.सविता) अंबेडकर जी के कार्य
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1) प्रधानमंत्री मोरराजजी देसाई इन्होंने यशवंत तथा भय्यासाहेब आंबेडकर इनके नेतृत्व में काम कर रहे शिष्टमंडल को बौद्धों के सवलतों के बारे में चर्चाएँ करने के लिए 17 अगस्त 1977 को दिल्ली में बुलाया था। माईसाहब खुद उस शिष्टमंडल के साथ जाकर उस मिटिंग में शामिल हुईं थी और उन्होंने अनुसूचित जातियों को जो आरक्षण की सवलते हैं वे सवलते बौद्धों को भी दि जाए ऐसी उन्होंने मांग की थी।
2) भौय्यासाहब के देहांत के बाद मुंबई के डाॅ.अंबेडकर सांस्कृतिक भवन में माई के अध्यक्षता में भरे हुए अधिवेशन में अनुसूचित जातियों को जो सवलते दी जा रही हैं वहीं सवलते बौद्धों को भी दी जाए और बौद्धों के लिए अलग से कानून हो ऐसा resolution संमत (पारित) किया गया और उसकी प्रतियाँ राज्य और केंद्र सरकार को भेजी गईं।
3) अयोध्या की विवादित बाबरी मस्जिद की जगह यह रामजन्मभूमी हैं ऐसा दावा गोपालसिंग इन्होंने केस नं. 4-1989 द्वारा अलाहबाद उच्चतम न्यायालय के लखनौं बेंच के समक्ष पेश किया था। इस दावे को आवाहन देकर यह जगह मुलतः केश नख विहार की हैं और उस जगह पर बौद्धों का हक हैं ऐसी याचिका 1990 में माईसाहब ने कोर्ट में डाला। माई की यह याचिका (दावा) कोर्ट ने खारिज की तब माई ने 1995 में यह विवादित जमीन मस्जिद या रामजन्मभूमी नहीं बल्कि मुलतः वहाँ केश नख विहार था और उस समय उस जगह का नाम साकेत था ऐसा उन्होंने पुराभिलेख (archive), इतिहास और चिनी यात्रियों के यात्राओं के वर्णनों के सबूत देकर दावा किया था। इतना ही नहीं उन्होंने थायलंड के राजा बुनावाला इन्हें (बौद्ध राष्ट्र के प्रमुख के नाते) 4 जनवरी 1991 में खत भेजकर अयोध्या की जगह पर बौद्धों का हक रहने का दावा कोर्ट में डालने का जिक्र करके उनके समर्थन में पुराभिलेख (archive) और इतिहास साथ में चिनी यात्रियों के यात्राओं के वर्णन आदि सबुत दिए साथ ही यहाँ बौद्धों का हक प्रस्थापित करने के लिए खुद राजा और उनका सरकार साथ देकर बौद्ध जनता से उन्होंने नैतिक समर्थन देने की बिनती भी की थी।
4) पुना (महाराष्ट्र) के सिम्बाॅयसिस ने बनाया हुआ डाॅ.अंबेडकर म्युझियम की वास्तू यह बौद्ध संस्कृति के प्रतिक स्तूप के रूप में रहे ऐसा माई ने कहाँ और सिम्बाॅयसिस के डाॅ.मुजुमदार इन्होंने माईसाहब के कहने पर म्युजियम को बौद्ध स्तूप के रूप में बनाया।
5) भारत सरकार ने जब जनगणना करना शुरू किया था तब माई ने निवेदन निकालकर साथ ही सभा संमेलनों से, मिटिंगो द्वारा बौद्ध जनता को आवाहन किया की उन्होंने जनगणना में अपनी पहचान बौद्ध बतानी चाहिए।
6) सरकार की ओर से होनेवाले डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर जन्मशताब्दि महोत्सव में क्या क्या करना चाहिए इसके बारे में जानकारी देनेवाला खत माईसाहब ने 19 जून 1990 को रामविलास पासवान (केंद्रीय मजदूर और समाजकल्याण मंत्री) को भेजा था। उसमें माईसाहब ने लिखा था की;
- बाबासाहब अंबेडकर जी का जहाँ जन्म हुआ था (महू, मध्यप्रदेश) उन्होंने जहाँ जहाँ शिक्षा ली थी उन गाँवों (दापोली, सातारा), वे जहाँ से राजनीति में सक्रिय थे (मुंबई, दिल्ली) और जहाँ उनका अंत्यविधि हुआ था (चैत्यभूमी मुंबई) यहाँ से सिधी जानेवाली एक रेल ' डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर एक्सप्रेस' नाम से शुरू की जाए
- मानवता के पुजारी जैसे डाॅ.अंबेडकर, नेल्सन मंडेला, अब्राहम लिंकन इनके स्मारक महत्वपूर्ण जगह पर बनाए जाएँ।
- पोस्ट की टिकट, लिफाफे, आंतरदेशिय खतों, कार्ड इनपर बाबासाहब अंबेडकर जी की तस्वीरें हो।
- 1,5,10,50,100 रूपयों के सिक्कों एवं नोटोंपर बाबासाहब अंबेडकर जी की तस्वीर हो।
- डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर जन्मशताब्दि 1990-91-92 ऐसा लिखा हुआ ग्रंथ और 1 लाख रूपये ऐसा ज्ञानपिठ सम्मान विद्वान व्यक्ति को दिया जाए।
- डाॅ. बाबासाहब अंबेडकर जी की छोटी सी जिवनी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल की जाए।
- बाबासाहब अंबेडकर जी के जीवन पर दो या ढाई घंटे की फिल्म तयार की जाए।
माईसाहब अंबेडकर जी ने इन्हीं मांगो से संबंधित एक खत भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री व्ही.पी.सिंग को भेजा था।
7) बाबासाहब अंबेडकर जी के रिडल्स इन हिन्दूजम् इस ग्रंथ में राम और कृष्ण की पहेलियाँ प्रकाशित न हो इसलिए मनुवादियों ने बड़ा बवाल मचाया था। किन्तु उनके खिलाफ अंबेडकरवादी लोगों ने एकजुट होकर एक बड़ा आंदोलन किया था इसके परिणाम स्वरूप बाबासाहब अंबेडकर जी का रिडल्स इन हिन्दूजम् यह ग्रंथ जैसा था वैसेही प्रकाशित हुआ। इस बात की माईसाहब को बहोत खुशी हुई थी। सभी गुटों ने एक होकर काम करना चाहिए ऐसा उन्होंने आवाहन किया था। डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर जी उपदेशों को याद कराकर एक रहने की अपने दिल की इच्छा जाहिर करने के लिए माईसाहब ने 14 जनवरी 1988 को एक खत लिखकर उसे अखबारों में प्रकाशित करने के लिए दिया था।
माईसाहब का सबसे बड़ा कार्य यह हैं की उन्होंने बाबासाहब अंबेडकर जी के साथ शादी करके उनकी अच्छे से देखभाल करके उनका समय समय पर वे ईलाज करती थी। अनेक व्याधियों से ग्रसित, उच्चशिक्षित, समाज का हरवक्त सोचनेवाले और अपना अधिकतम समय पढ़ने वाले बाबासाहब अंबेडकर जी को माईसाहब ने बहोत साथ दी।💐💐💐 डॉक्टर मां साहब आंबेडकर नहीं होती ,तो- हमें भारतीय संविधान, बुद्ध एंड हिज धम्म और वि्श्व मान्य बौद्ध धम्म शायद हमें नहीं मिलता.💐💐💐💐💐💐💐
साभार :- विजय सुरवाडे
संकलन और हिन्दी अनुवाद :- अमित इंदूरकर...।।।साभार........
माईसाहब (डाॅ.सविता) अंबेडकर जी के कार्य
Monday, 28 January 2019
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माईसाहब (डाॅ.सविता) अंबेडकर जी के कार्य
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1) प्रधानमंत्री मोरराजजी देसाई इन्होंने यशवंत तथा भय्यासाहेब आंबेडकर इनके नेतृत्व में काम कर रहे शिष्टमंडल को बौद्धों के सवलतों के बारे में चर्चाएँ करने के लिए 17 अगस्त 1977 को दिल्ली में बुलाया था। माईसाहब खुद उस शिष्टमंडल के साथ जाकर उस मिटिंग में शामिल हुईं थी और उन्होंने अनुसूचित जातियों को जो आरक्षण की सवलते हैं वे सवलते बौद्धों को भी दि जाए ऐसी उन्होंने मांग की थी।
2) भौय्यासाहब के देहांत के बाद मुंबई के डाॅ.अंबेडकर सांस्कृतिक भवन में माई के अध्यक्षता में भरे हुए अधिवेशन में अनुसूचित जातियों को जो सवलते दी जा रही हैं वहीं सवलते बौद्धों को भी दी जाए और बौद्धों के लिए अलग से कानून हो ऐसा resolution संमत (पारित) किया गया और उसकी प्रतियाँ राज्य और केंद्र सरकार को भेजी गईं।
3) अयोध्या की विवादित बाबरी मस्जिद की जगह यह रामजन्मभूमी हैं ऐसा दावा गोपालसिंग इन्होंने केस नं. 4-1989 द्वारा अलाहबाद उच्चतम न्यायालय के लखनौं बेंच के समक्ष पेश किया था। इस दावे को आवाहन देकर यह जगह मुलतः केश नख विहार की हैं और उस जगह पर बौद्धों का हक हैं ऐसी याचिका 1990 में माईसाहब ने कोर्ट में डाला। माई की यह याचिका (दावा) कोर्ट ने खारिज की तब माई ने 1995 में यह विवादित जमीन मस्जिद या रामजन्मभूमी नहीं बल्कि मुलतः वहाँ केश नख विहार था और उस समय उस जगह का नाम साकेत था ऐसा उन्होंने पुराभिलेख (archive), इतिहास और चिनी यात्रियों के यात्राओं के वर्णनों के सबूत देकर दावा किया था। इतना ही नहीं उन्होंने थायलंड के राजा बुनावाला इन्हें (बौद्ध राष्ट्र के प्रमुख के नाते) 4 जनवरी 1991 में खत भेजकर अयोध्या की जगह पर बौद्धों का हक रहने का दावा कोर्ट में डालने का जिक्र करके उनके समर्थन में पुराभिलेख (archive) और इतिहास साथ में चिनी यात्रियों के यात्राओं के वर्णन आदि सबुत दिए साथ ही यहाँ बौद्धों का हक प्रस्थापित करने के लिए खुद राजा और उनका सरकार साथ देकर बौद्ध जनता से उन्होंने नैतिक समर्थन देने की बिनती भी की थी।
4) पुना (महाराष्ट्र) के सिम्बाॅयसिस ने बनाया हुआ डाॅ.अंबेडकर म्युझियम की वास्तू यह बौद्ध संस्कृति के प्रतिक स्तूप के रूप में रहे ऐसा माई ने कहाँ और सिम्बाॅयसिस के डाॅ.मुजुमदार इन्होंने माईसाहब के कहने पर म्युजियम को बौद्ध स्तूप के रूप में बनाया।
5) भारत सरकार ने जब जनगणना करना शुरू किया था तब माई ने निवेदन निकालकर साथ ही सभा संमेलनों से, मिटिंगो द्वारा बौद्ध जनता को आवाहन किया की उन्होंने जनगणना में अपनी पहचान बौद्ध बतानी चाहिए।
6) सरकार की ओर से होनेवाले डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर जन्मशताब्दि महोत्सव में क्या क्या करना चाहिए इसके बारे में जानकारी देनेवाला खत माईसाहब ने 19 जून 1990 को रामविलास पासवान (केंद्रीय मजदूर और समाजकल्याण मंत्री) को भेजा था। उसमें माईसाहब ने लिखा था की;
- बाबासाहब अंबेडकर जी का जहाँ जन्म हुआ था (महू, मध्यप्रदेश) उन्होंने जहाँ जहाँ शिक्षा ली थी उन गाँवों (दापोली, सातारा), वे जहाँ से राजनीति में सक्रिय थे (मुंबई, दिल्ली) और जहाँ उनका अंत्यविधि हुआ था (चैत्यभूमी मुंबई) यहाँ से सिधी जानेवाली एक रेल ' डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर एक्सप्रेस' नाम से शुरू की जाए
- मानवता के पुजारी जैसे डाॅ.अंबेडकर, नेल्सन मंडेला, अब्राहम लिंकन इनके स्मारक महत्वपूर्ण जगह पर बनाए जाएँ।
- पोस्ट की टिकट, लिफाफे, आंतरदेशिय खतों, कार्ड इनपर बाबासाहब अंबेडकर जी की तस्वीरें हो।
- 1,5,10,50,100 रूपयों के सिक्कों एवं नोटोंपर बाबासाहब अंबेडकर जी की तस्वीर हो।
- डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर जन्मशताब्दि 1990-91-92 ऐसा लिखा हुआ ग्रंथ और 1 लाख रूपये ऐसा ज्ञानपिठ सम्मान विद्वान व्यक्ति को दिया जाए।
- डाॅ. बाबासाहब अंबेडकर जी की छोटी सी जिवनी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल की जाए।
- बाबासाहब अंबेडकर जी के जीवन पर दो या ढाई घंटे की फिल्म तयार की जाए।
माईसाहब अंबेडकर जी ने इन्हीं मांगो से संबंधित एक खत भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री व्ही.पी.सिंग को भेजा था।
7) बाबासाहब अंबेडकर जी के रिडल्स इन हिन्दूजम् इस ग्रंथ में राम और कृष्ण की पहेलियाँ प्रकाशित न हो इसलिए मनुवादियों ने बड़ा बवाल मचाया था। किन्तु उनके खिलाफ अंबेडकरवादी लोगों ने एकजुट होकर एक बड़ा आंदोलन किया था इसके परिणाम स्वरूप बाबासाहब अंबेडकर जी का रिडल्स इन हिन्दूजम् यह ग्रंथ जैसा था वैसेही प्रकाशित हुआ। इस बात की माईसाहब को बहोत खुशी हुई थी। सभी गुटों ने एक होकर काम करना चाहिए ऐसा उन्होंने आवाहन किया था। डाॅ.बाबासाहब अंबेडकर जी उपदेशों को याद कराकर एक रहने की अपने दिल की इच्छा जाहिर करने के लिए माईसाहब ने 14 जनवरी 1988 को एक खत लिखकर उसे अखबारों में प्रकाशित करने के लिए दिया था।
माईसाहब का सबसे बड़ा कार्य यह हैं की उन्होंने बाबासाहब अंबेडकर जी के साथ शादी करके उनकी अच्छे से देखभाल करके उनका समय समय पर वे ईलाज करती थी। अनेक व्याधियों से ग्रसित, उच्चशिक्षित, समाज का हरवक्त सोचनेवाले और अपना अधिकतम समय पढ़ने वाले बाबासाहब अंबेडकर जी को माईसाहब ने बहोत साथ दी।💐💐💐 डॉक्टर मां साहब आंबेडकर नहीं होती ,तो- हमें भारतीय संविधान, बुद्ध एंड हिज धम्म और वि्श्व मान्य बौद्ध धम्म शायद हमें नहीं मिलता.💐💐💐💐💐💐💐
साभार :- विजय सुरवाडे
संकलन और हिन्दी अनुवाद :- अमित इंदूरकर...।।।साभार........
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