हम भारतीय, प्रथमतः और अंततः - कई सवाल जवाब एक।

हम भारतीय, प्रथमतः और अंततः -
कई सवाल जवाब एक।

भारतीय समाज का बडा तबका  विशेषतः OBC, SC/ST यह समाज बहुसंख्य तोर पर मूर्ख वर्ग साबीत हो रहा है। यह सरकार के नाकामयाबी पर सवाल उठाने की जगाह अपने ही देश के दुसरे धर्म के नागरिक  विशेषतः मुस्लिम के खिलाफ जाकर अपनीही राष्ट्रीय एकता को मुश्किल मे डाल रहा है, तत्सम उच्च वर्गीय ब्राह्मण और अन्य सवर्ण इन के इस अज्ञानता का भरपूर लाभ उठाते हुवे, वे अपनी राजनैतिक मनीषा तथा स्तर  कायम रखकर भरपूर लाभ उठा रहे है जो इन बहुसंख्यांक लोगो के हानी से, तथा इनके हक्को को कुचलकर मिलता है। हम सवाल उठाने से डरते है, और कोई व्यवस्था को सवाल पुछे तो उसे हिम्मत  देना, महत्व हीन समजते है, जबकी यही दुर्बलता की निशाणी है।

 में एसेही शोषित वर्ग से आता हू, जो इन चंद उच्च वर्गीय लोगोके योजना से प्रभावित हू। मुझे उनके ताकतवर होणे से बेचैनी नही है, नाही में उनके सोच से दुःखी हू, बलकी अपणे ही लोगो की अज्ञानता और मुर्खता मुझे भयभीत करती है। इस राष्ट्र के भविष्य को सोचकर मुझे  बेहद चिंता और बेचैनी है। गर्व तो होता है की में एक अभ्यासू और विज्ञानवादी आधुनिक विचारधारा रखणे वाला जागरूक नागरिक हू और ऊस भीड का हिस्सा नही हू जो सिर्फ इंसान
को उस्के धर्म और जाती से मापता हो।

  मेरे जैसे अनेक है, लेकींन वह अलग-अलग बटे हुवे है और ये बात मुझमे उतनीही चिंता पैदा कर देती है। मेरा सवाल है क्या इस देश का बहुसंख्यक वर्ग जागरूक होंगा?, अपने लिये क्या बेहतर है समज पायेगा?, अगर हा तो कब?
जो जागरूक है इस आने वाले महाभयंकर विषमता वादी, निर्बुद्ध प्रलय को रोखणे मे सक्षम हो पायेगा? क्या दुनिया का सबसे बडा लोकशाही कहे जानेवाला देश अपने लोगो के हक्क को बरकरार रख पायेगा ?, खैर कई सवाल है, मगर जवाब एक ही है। उसे ढुंडकर हमे अमल मे लाना है ।मेरा जीवन एक कठीण सफर जीसका मे स्विकार करता हू। ऊस महान न्याय दाता के शब्द मुझे इन कई परेशनीयो से लढनेकी शक्ती देकर, एक जिम्मेदार नागरिक होणे का अहेसास दिलाकर गर्व की अनुभूती दिलाते है।
 हा मुझे गर्व है की में प्रथमतः और अंततः भारतीय हू। यही डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जी के शब्द हमे एक बनाने मे काफी है, इस मे कोई शंका नही इन्हे अमल मे लाना ही हमारी सबसे बडी समस्या का समाधान है।


- सिद्धांत राजू नितोने.
अकोला. महाराष्ट्र (भारत)
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