✍️ आपले लेख पाठवा
🆕 नवीन लेख

    बालमजदूरी और भूकमरी- देश के विकास मे सबसे बडी समस्याओ मे एक :- Ambedkar Movement


    बालमजदूरी और भूकमरी- देश के विकास मे सबसे बडी समस्याओ मे एक .

    नोवल कोरोना एक वैश्विक समस्या है, सभी देश की  सरकार एवं जनता इससे पुरी तराह बाहर निकलने की कोशीश कर रहे है। यह सब जाणते है लेकींन आज इस मुश्किल की घडी मे देश के सबसे बडे समस्या पर  एक नजर डालते है ।

    बालमजदूरी-

     साल 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 5-14 आयु वर्ग के एक करोड़ से भी  ज्यादा बच्चे बाल श्रम की दलदल में धकेले गए हैं. लेकींन क्या कायदे सक्त होणे से इस्का समाधान हो सकता है कुछ भले लोग और संस्थाये मदत भि करती है, लेकींन वह भी सिमित तौर पर। फिर भि हम इन समस्यावो से आज भी झुलज रहे है क्या इस देश की जनता और खासकर सरकार इन बच्चो के लिये ठोस कूछ कर पाई है?  अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 15.2 करोड़ बच्चे बाल श्रम के लिए मजबूर हैं।

    हम ट्राफिक सिग्नल रोड पर कई बेबस मासुमो को देखते है इसमे ज्यादा तर औरते और बच्चे होते है। क्या कभी किसी सरकार व्यक्ती विशेष ने इन लोगो को समजाकर या सक्ती से सार्वजनिक तोर पर शिक्षा खाना अच्छा जीवन देने का उपक्रम किया है?

    बलकी इन के प्रति हमारी सोच भी निर्दयी है। अगर कोई बच्चा शिक्षा ना होणे के कारण गुन्हेगारी की और बढता है तो क्या इसमे हमारा कोई दोष नही?

    सरकारी बाबू दफ्तर मे कोई गरीब चाहे वह औरत क्यू ना हो उस्से बात करणे की तेहजीब भुलकर उन्हे अपमानित करता है। हमे इस सोच मे बदलाव लाने की सक्त जरूरत है तभी सामाजिक बदलाव होंगा।

    मुखमरी -

    17 अकटुबर 2019 के दैनिक भास्कर के रिपोर्ट अनुसार,

    वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई) ने भुखमरी से जूझ रहे 117 देशों की जारी की। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2014 के बाद स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं आया है। इस लिस्ट में भारत 102वें नंबर पर है। जबकि पड़ोसी देश पाकिस्तान (94वें), बांग्लादेश (88वें), नेपाल (73वें) और श्रीलंका (66वें) भारत से बेहतर स्थित में हैं।

    क्या आज भी हमे जात, धर्म, पक्ष इनकी निष्ठा जरुरी है, या भारत के संविधान के मूल्य। सरकार मार्गदर्शन तत्व पर काम करती है या नही ये  देखणा भी जरुरी है। भारतरत्न जिन्हे विश्वरत्न कहा जाता है, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इनके कामगार और सकल भारत के रचना मे प्रमुख योगदान है। बाबासाहेब जी ने कामगार और महिला एवं बालको  की समस्या को काफी हद तक समाप्त करदीया है। उनके लिखे कानून का सही उपयोग से ही देश के समस्या का समाधान है। 

     भारतीय संविधान में मौलिक अधि‍कारों और नीति निर्देशों के अनुसार कहा गया है।

    1.  धारा 24-  14 साल से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्ट्री या खदान में कार्य करने के लिए नियुक्त नहीं किया जाएगा और ना ही किसी खतरनाक नियोजन में नियुक्त किया जाएगा।

     2. धारा 39-ई - राज्य अपनी नीतियां इस तरह निर्धारित करे कि श्रमिकों, पुरूषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी क्षमता सुरक्ष‍ित रह सकें, बच्चों की कम उम्र का शोषण न हो, न ही वे अपनी उम्र और शक्ति के प्रतिकूल, आर्थ‍िक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रवेश करें ।

     3 .धारा 39 -एफ - बच्चों को स्वस्थ्, स्वतंत्र व सम्मानजनक स्थिति में विकास के अवसर व सुविधाएं दी जाएंगी और बचपन व युवावस्था के नैतिक व भौतिक दुरूपयोग से बचाया जाएगा।

    4 . संविधान लागू होने के 10 साल के भीतर राज्य 14 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रयास करेंगे (धारा 45)।

    परिवार नियोजन के साथ आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक नियोजन का सामाजिकरण का सार्वजनिक अभियान तथा बाबासाहेब के विचारो पर अमल अनिवार्य होने से ही अच्छे बदलाओ की चिंगारी सुलग सकेगी।


     -सिद्धांत नितोने.
    अकोला,महाराष्ट्र(भारत)
    Previous article
    Next article

    Leave Comments

    Post a Comment

    Iklan Atas Artikel

    Iklan Tengah Artikel 1

    Iklan Tengah Artikel 2

    Iklan Bawah Artikel

    WhatsApp
    ⇧
    🌐 भाषा: